5G (fifth generation) Technology in Hindi
आज एक कंपनी ने अपनी 5G की speed testing की है और 100 GBps तक का data transfer speed achieve किया है। लेकिन इतनी ज्यादा high speed हम इंसानो को किस कीमत पर मिलने वाली है क्या ये 5G हम इंसानो के लिए खतरा है।![]() |
| 5G Technology |
पूरी दुनिया में आज एक Technology काफी चर्चा का विषय बनी हुई है । कुछ इसका criticism कर रहे है तो कुछ समर्थन कर रहे है और वो Technology है 5G (Fifth Generation) आप में से भी कई इसका बेसब्री से इंतेजर कर रहे होंगे की ये आखिर इंडिया कब आयेंगा और आपके मन में भी काफी सवाल उठ रहे होंगे जैसे की ये इंडिया में कब लांच होंगी इसकी speed क्या होंगी और न जाने ऐसे ही कई सवाल।
आज एक कंपनी ने अपनी 5G की speed testing की है और 100 GBps तक का data transfer speed achieve किया है। लेकिन इतनी ज्यादा high speed हम इंसानो को किस कीमत पर मिलने वाली है क्या ये 5G हम इंसानो के लिए खतरा है। आज इस पोस्ट में आपको 5G के बारे में पूरी information indepth मिलने वाली है तो ready हो जाओ जानने के लिए 5G का पूरा सच।
आज पूरे 1.37 billion की आबादी वाले भारत में करीब 800 million mobile phone का use होता हैं और उसमें से करीब 627 million लोग internet का use करते हैं एक रिपोर्ट के मुताबिक एक इंसान करीब 20 से 40 GB तक डाटा हर महीने इस्तेमाल करता है जैसे 1 घंटे के ऑनलाइन गेम में 20MB-50MB तक का डाटा खर्च हो जाता है अगर आप कोई गाना सुनते तो हो उसमें 5MB-10MB तक का डाटा use हो जाता है अगर आप Youtube पर कोई video देख लेते हो तो 300 से 400MB या 1GB तक डाटा खर्च हो जाता है भारत में इसकी अहम वजह तो jio ही है। अगर आप कोई एक ईमेल भी भेजते हो तो उसमें 20KB से 30KB DATA USE हो जाता है और अगर आप एक text फाइल बनाते हो और उसमें कोई नाम लिखते हो जैसे की MYRULESZ तो उस text file का size 8 bytes हो जाएगा मतलब 1 Letter का size 1 byte का। तो आप खुद ही सोच सकते हो 500 MB - 600 MB की Movie में कितनी information होती होंगी। और आप उस पर सिर्फ 1 click करके within मिली सेकंड देख पाते हो और इसी process को पूरा करने का काम करता है इंटरनेट। इंटरनेट का top most purpose information को source से destination तक पहुंचाने का है इस काम को बिना किसी Latency से करने का तरीका है अगर हम इस information को speed of light से ट्रैवल करवा सके तो
Latency का मतलब है जैसे आप अपनी आंखों से किसी और चीज़ को देख रहे हो तो आपकी आंखें उस फंक्शन को nerve cells की मदद से आपके दिमाग तक भेजेंगे फिर आपका दिमाग उस डाटा को प्रोसेस करेगा और तब आपको समझ आएगा कि वह एक हाथी की फोटो है तो आप की आंख से हाथी को देखने से लेकर आपके दिमाग को उसको समझने में जितना टाइम लगा है उसी ही लेटेंसी कहते हैं और यह Latency जितनी कम होगी इंटरनेट उतना ही फास्ट चलेगा। इंटरनेट को चलाने के लिए हम काम में लाते हैं Light Signal और electromagnetic waves को और दोनों की ही travelling speed Light of Speed के बराबर होती है
इस नेटवर्क को आप घर की वायरिंग की तरह समझ सकते हैं जैसे आपके घर के सारे Appliances आपस में वायर के थ्रू कनेक्ट होते हैं और हम जो स्विच ऑन करते हैं वह कनेक्शन का सर्किट कम्पलीट हो जाता है और उसमें से करंट फ्लो करने लगता है और वह Appliance ON हो जाता है।
बिल्कुल इसी तरह दुनिया के सारे इंटरनेट डिवाइसेज जैसे कि Phone, Computer, Smart Watch आदि यह सभी चीजें आपस में दो medium के थ्रू कनेक्ट होते है। पहला Optical Fiber Cable और दूसरा Electromagnetic Waves .
Optical Fiber Cable & Electromagnetic Waves
इंफॉर्मेशन पहले आप के डाटा सेंटर से आपके लोकल एरिया सेल टावर तक लाइट सिगनल के फॉर्म में optical fiber cable के अंदर से ट्रैवल करते हुए आता है और उसके बाद cell tower में लगे ट्रांसमीटर एंटीना EM Waves के फॉर्म में Transmit करते हैं और आपके फोन में लगे Universal Antenna इस information को रिसीव करते हैं और इस तरह एक सर्किट कंप्लीट हो जाता है।इसलिए Optical Fiber Cable को हम इंटरनेट का Backbone भी कह सकते हैं ये Optical Fiber Cable समुद्र के नीचे से और पहाड़ों के ऊपर से होते हुआ पूरी दुनिया को आपस में कनेक्ट करके रखते है। यानी इंटरनेट की वायरिंग पूरी दुनिया में फैली हुई है। हमारे इंटरनेट की स्पीड mainly cell towers टेक्नोलॉजी और उसकी Electromagnetic Radio Waves की frequency और benefit पर डिपेंड करती है अभी तक हमारे पास 4G LET है जो हमें शायद Web Surfing, YouTube और ऐसी लोकल साइट के लिए sufficient है।
लेकिन बहुत सारी ऐसी इंडस्ट्रीस है जो 5G के आने के बाद पूरी तरह से बदल सकती है जैसे हेल्थ केयर इंडस्ट्री, एविएशन इंडस्ट्री। इंडिया में करीब 1000 लोगों पर एक डॉक्टर है और अगर हम Rural Area की बात करें तो वहां पर एक अच्छा डॉक्टर ना होने पाने की वजह से काफी लोगो को अपनी जान भी गवानी पड़ती है और अगर 5G इन जगह पर पहुंच जाता है तो डॉक्टर clinical variables और health monitoring devices की मदद से डॉक्टर पेशंट को remotely एग्जामिन कर सकते हैं और यह बिल्कुल real time में हो पाएगा आज हम 4G की मदद से ऐसा कुछ करने की कोशिश करेंगे तो 4G की Latency करीब 300 से 400 मिली सेकंड की है लेकिन हम अगर वही 5G की बात करे तो उसकी Latency घटकर 30 से 40 मिली सेकंड हो जाती है। मानलीजिए जैसे अगर वह डॉक्टर अमेरिका में बैठ के इंडिया के गांव में किसी इंसान का ऑपरेशन करने के लिए कट लगाएगा तो अमेरिका में कट लगाने के 30 मिली सेकंड के बाद ही यहां इंडिया में इंटरनेट से जुड़ी मशीन वही मूवमेंट 30 मिली सेकंड बाद परफॉर्म कर देंगी याने वह मशीन डॉक्टर के मूवमेंट को बिल्कुल real time में कॉपी कर पाएंगी।
अगर आप में से कोई PUBG खेलता होगा तो उसे ping के बारे में पता ही होगा अगर game में ping ज्यादा होती है तो हमारा game बहुत Lag करता है और हम किसी को मारते हैं तो वह रियल टाइम में वहां मौजूद ही नहीं होता इसलिए हमारा एम करना लगभग impossible हो जाता है लेकिन अगर ping 35 से 40 मिली सेकंड के बीच होती है तो हम game आसानी से गेम खेल सकते हैं।
5G टेक्नोलॉजी के बारे में अभी हम कुछ भी सटीकता के साथ नहीं कह सकते यह टोटली कंपनियों पर डिपेंड करता है मगर जिन कंपनियों ने 5G की टेस्टिंग की है आज हम उन टेक्नोलॉजी की बात कर सकते हैं ।Millimeter wave spectrum 40 GHz से 300 GHz की वह bandwidth है जो आज तक किसी भी टेलीकॉम कंपनी ने use नहीं किया है और 5G टेक्नोलॉजी में इसी bandwidth का इस्तेमाल किया जाएगा।
ज्यादा bandwidth होने की वजह से ज्यादा डिवाइसइस को इसमें सेम टाइम में कनेक्ट कर सकते हैं लेकिन यह millimeter wave ज्यादा डिस्टेंस तक travel नहीं कर सकती बिल्डिंग पेड़ या फिर कोई भी solid चीज इनको absorb कर सकती है जिसे information Loss होने का खतरा हो सकता है तो अब इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए छोटे-छोटे सेल टॉवर्स को एक-दूसरे से काफी नजदीक इंस्टॉल किया जाएगा और यह एक सिग्नल को 1 beam की फॉर्म में डायरेक्ट ली अपने टारगेट फोन तक पहुंचा पाएगा।
मल्टीपल इनपुट मल्टीपल आउटपुट
जो भी डाटा सेल टावर ट्रांसमिट या रिसीव करता है उसमें मेन रोल टावर में लगे एंटीना का होता है आज एक Tower में लगभग 10 से 13 एंटीना लगे होते हैं लेकिन 5G के Tower में यह बढ़कर करीब सौ के आसपास हो सकते हैं।
Mobile Phone Generations
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| Mobile Phone Generation From 1G to 5G |
• 1G: मोबाइल वॉयस कॉल
Analog Signals
Basic Voice Service
Analog Based Protocol
Year : 1980
• 2G: मोबाइल वॉयस कॉल और एसएमएस
Voice and SMS Service
Year : 1990
• 3G: मोबाइल वेब ब्राउजिंग
Voice and Data
Fast internet up to 2000kbps
Video Calling & Streaming
Year : 2001
• 4G: मोबाइल वीडियो की खपत और उच्च डेटा गति
Smartphones
Year : 2009
• 5G: उपभोक्ताओं की सेवा और उद्योगों के डिजिटलाइजेशन की तकनीक।
Internet Of Things (IoT)
Year : 2020
Analog Signals
Basic Voice Service
Analog Based Protocol
Year : 1980
• 2G: मोबाइल वॉयस कॉल और एसएमएस
Voice and SMS Service
Year : 1990
• 3G: मोबाइल वेब ब्राउजिंग
Voice and Data
Fast internet up to 2000kbps
Video Calling & Streaming
Year : 2001
• 4G: मोबाइल वीडियो की खपत और उच्च डेटा गति
Smartphones
Year : 2009
• 5G: उपभोक्ताओं की सेवा और उद्योगों के डिजिटलाइजेशन की तकनीक।
Internet Of Things (IoT)
Year : 2020
Full-duplex
पहले मोबाइल फोन में एक टाइम पर एक ही आदमी बोल सकता था और दूसरा आदमी केवल उसकी बात को सुन सकता था। इसलिए "over and out" जैसे keywords का इस्तेमाल किया जाता था। ताकि सामने वाले इंसान को पता चल जाए कि उसने अपनी बात कंप्लीट कर दी है। क्योंकि बेसिक एंटीना एक टाइम एक ही काम कर सकता था या तो ट्रांसमीटर का या रिसीवर का उसको आप rail track की तरफ भी समझ सकते हो।अगर एक ही ट्रैक पर आमने सामने से दो ट्रेन आ जाती है तो वह same track से same टाइम पर नहीं निकल पाएंगे।
लेकिन फुल डुप्लेक्स में हम एक सर्कुलर बायपास क्रिएट करदेंगे और वह टकराने के बजाय अलग-अलग ट्रक से पास हो जाएंगी
5G के आने से पहले काफी scientist और researchers ने 5G टेक्नोलॉजी को human health care perspective से काफी Criticize कर रहे हैं और इसकी कई कारण है। हमारे बॉडी की स्किन जो कि एक एंटीना की तरह काम करती है जो signals को continuously transmit और receive करती रहती है और एक signal की frequency ज्यादा हो जाए तो यह हमारी DNA या skin cells को damage कर सकती है। कुछ दिनों पहले ही doctor, Scientist और environmental organisations मिल कर तुरंत 5G के deployment को रोकने की मांग की थी और उनका का कहना था कि 5G Humanity के साथ एक experiment है और यह international law के तहत एक क्राइम है और उनका कहना है कि MM Waves का इस्तेमाल कर crowd को deter or drive करने के लिए किया जाता था। इन MM waves से लोगों के skin में एक जलन से पैदा होने लगती थी जिसकी वजह से भीड़ बिखर जाती थी। Human Body में हमेशा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल के throw information transmit या receive होती रहती है और जब तक इसकी frequency balance होती है तब तक हमारी फिजिकल एंड मेंटल state normal बनी रहती है यह तो आप सभी को पता ही होगा कि हमारे शरीर और दिमाग की एक नेचुरल Frequency होती है जिसमें वह normal state में रहती है। अगर हम किसी की मेंटल Frequency को चेंज कर दे तो इससे हम उसके मूढ़ को भी बदल सकते हैं।
जैसे आपने Captain America के Bucky को देखा होगा जब डायरी में लिखे शब्द एक sequence के form में सुनाए जाते हैं तो वो शब्दो सुनके उसके दिमाग की Frequency चेंज हो जाती थी और वो उसकी हर बात सुनने लगता था।
साइंटिस्ट का कहना है कि की Frequency इलेक्ट्रिकल कम्युनिकेशन सिस्टम को imbalance कर सकती है। और इस तरह यह एक इमोशनल मेंटल फिजिकल या साइकोलॉजिकल डिजीज का कारण बन सकती है हमारा दिमाग एक Frequency बैंड के अंदर काम करता है अगर किसी external wave की Frequency के अंदर चली जाती है तो इससे किसी के brain perspective को external चेंज किया जा सकता है। यानी किसी के दिमाग में उसकी समझ को चेंज किया जा सकता है। लोगों को external influence किया जा सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक Frequency और emotional state में एक रिलेशन होता है।
कुछ टाइम पहले एक रिसर्च की गई थी इसमें 2 लोगों के ग्रुप को अलग अलग रखा गया था। पहले ग्रुप था जो काफी दुखी था। मतलब उनके अंदर काफी चीज को लेकर काफी गुस्सा था और एक ऐसा ग्रुप था जिसमें हर चीज को लेकर प्यार और +Ve Positivity थी जब इन दोनों रूम की frequency को मॉनिटर किया गया तो पता चला कि इन दोनों रूम की फ्रिकवेंसी एक-दूसरे से काफी अलग है इस रिसर्च के मुताबिक इन Frequency को यूज करके हम किसी भी इंसान को इमोशनल स्टेट को चेंज कर सकते हैं या उसके अंदर बदले की भावना पैदा कर सकते हैं या फिर उसे डिप्रेशन में भी डाल सकते हैं और लोगों को इसके बारे में पता भी नहीं चलेगा अगर यह प्रोसेस किसी कम्युनिटी के ऊपर किया गया तो हो सकता है कि वह एक जंग का रूप ले ले आपको शायद यह बातें सुनने में काफी अजीब लग रही होगी और इस पर यकीन भी नहीं हो रहा होगा।
5G टेक्नोलॉजी की अलग-अलग कंपनीया अलग अलग तरह से इस्तेमाल करने वाली है। अब देखने की बात यह है कि कौन सी कंपनी इसे पहले Launch करती है हो सकता है। 5G के दुष्परिणाम हमें आज देखने को ना मिले लेकिन हमारी आने वाली Generation पे इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है। आज 5G दुनिया की सबसे बड़ी conspiracy में से एक बन गया है और इसका Future क्या होगा ये अभी कहा नहीं जा सकता।
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Good information.
ReplyDeletethank you so much for your valuable comment
DeleteVery easy to understand.
ReplyDeletethank you so much for your valuable comment
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